कोरबा की उपलब्धि: लगातार 15वें साल ‘जीरो शार्टेज’ का कीर्तिमान, लचर परिवहन और हाथी के खतरे के बीच 650 करोड़ का धान परिदान

कोरबा/कटघोरा: छत्तीसगढ़ के आदिवासी बहुल जिले कोरबा ने खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 के धान खरीदी अभियान में अपनी ईमानदारी और कार्यकुशलता का लोहा एक बार फिर मनवाया है। तमाम चुनौतियों, लचर परिवहन व्यवस्था और वन्यजीवों के खतरों के बावजूद, जिले ने लगातार 15वें वर्ष ‘जीरो शार्टेज’ (शत-प्रतिशत धान जमा) का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है।
650 करोड़ का धान, 1.37 करोड़ का इनाम
कलेक्टर कुणाल दुदावत के कुशल मार्गदर्शन में कोरबा जिले की 41 सेवा सहकारी समितियों के 65 केंद्रों ने शासन को पूर्ण परिदान कर दिया है।
- कुल खरीदी: 27 लाख 47 हजार 101 क्विंटल धान।
- कुल मूल्य: 650 करोड़ 78 लाख 82 हजार 742 रुपये।
- प्रोत्साहन राशि: जीरो शार्टेज के लिए समितियों को 1.37 करोड़ रुपये का बोनस मिलेगा।
- कुल भुगतान: कमीशन और प्रोत्साहन राशि मिलाकर समितियों को कुल 10.16 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

बरपाली केंद्र रहा ‘सिरमौर’
इस वर्ष बरपाली समिति ने जिले में सर्वाधिक 88,370 क्विंटल धान की खरीदी कर रिकॉर्ड बनाया। शत-प्रतिशत परिदान के बदले इस समिति को सबसे अधिक 4.41 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।
चुनौतियों भरा रहा सफर: हाथी का हमला और परिवहन की सुस्ती
इस गौरवशाली उपलब्धि के पीछे का संघर्ष काफी पीड़ादायक रहा है। मार्कफेड की सुस्त परिवहन व्यवस्था के कारण केंद्रों पर धान का जमावड़ा लगा रहा।
दुखद घटना: 5 मार्च की रात, कुदमुरा केंद्र पर 1100 क्विंटल धान की रखवाली कर रहे फड़ प्रभारी राजेश सिंह की हाथी के हमले में जान चली गई। सुरक्षा और संसाधनों की कमी के बावजूद कर्मचारियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर शासन के अनाज की रक्षा की।
कागजी रिकॉर्ड के पीछे का ‘दर्द’
भले ही रिकॉर्ड में ‘जीरो शार्टेज’ दर्ज है, लेकिन धरातल पर समितियों ने भारी नुकसान सहा है। कर्मचारियों के अनुसार, बेमौसम बारिश, सूखत (Moisture loss) और परिवहन में देरी के कारण कई केंद्रों को 100 क्विंटल तक के धान की अंतर राशि अपनी जेब से भरनी पड़ी है ताकि जिले का ‘बेदाग’ रिकॉर्ड बना रहे। अब समितियों को उम्मीद है कि शासन जल्द ही कमीशन की राशि जारी करेगा ताकि कर्मचारियों के वेतन का भुगतान हो सके।

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