मानव-हाथी द्वंद्व प्रबंधन: “जनहानि शून्य – हाथी हानि शून्य” के लक्ष्य के साथ चोटिया में कार्यशाला संपन्न

कोरबा/चोटिया: छत्तीसगढ़ शासन के वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा मानव-हाथी संघर्ष को कम करने और सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हाथी नियंत्रण केंद्र, चोटिया (वन परिक्षेत्र केंदई) में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का मुख्य संकल्प “हाथियों से जनहानि शून्य तथा मानवों से हाथी हानि शून्य” सुनिश्चित करना रहा।
प्रमुख उपस्थिति एवं नेतृत्व
कार्यशाला में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC) के प्रोजेक्ट टाइगर एवं हाथी डिवीजन के सदस्य श्री के. के. बिसेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वनमंडल अधिकारी (DFO) श्री कुमार निशांत ने की।
इस अवसर पर सहायक वन संरक्षक सुश्री यामिनी पोर्ते, वन परिक्षेत्र अधिकारी केंदई श्री अभिषेक कुमार दुबे सहित विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, हाथी मित्र दल और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित थे।

जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता
कार्यक्रम में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, जिनमें शामिल थे:
- श्री भारत सिंह सिदार (जनपद सदस्य)
- श्री लाल बहादुर (सरपंच, ग्राम पंचायत लाद)
- श्री जवाहर सिंह (सरपंच, ग्राम पंचायत परला)
- श्रीमती प्यारो बाई (सरपंच, ग्राम पंचायत चोटिया)
कार्यशाला के मुख्य बिंदु: प्रबंधन और रणनीति
चर्चा के दौरान विशेषज्ञों और वक्ताओं ने मानव-हाथी द्वंद्व के समाधान के लिए निम्नलिखित तकनीकी और व्यावहारिक पहलुओं पर जोर दिया:
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- प्रारंभिक चेतावनी तंत्र: हाथियों की उपस्थिति की सूचना समय रहते ग्रामीणों तक पहुँचाना।
- त्वरित प्रतिक्रिया (QRT): सूचना मिलते ही हाथी मित्र दल और फ्रंट लाइन स्टाफ की सक्रियता।
- डिजिटल प्रशिक्षण: कर्मियों को व्हाट्सएप, वीडियो कॉल और ऑनलाइन बैठकों के माध्यम से आधुनिक संसाधनों से लैस करना।
- सह-अस्तित्व: हाथियों के विचरण मार्ग को समझने और उनके साथ सुरक्षित दूरी बनाए रखने पर जन-जागरूकता।
”ग्राम पंचायतों के सरपंच, पटवारी, कोटवार, हाथी मित्र दल और फ्रंट लाइन स्टाफ के समन्वित प्रयासों से ही हम जनहानि और हाथी हानि को पूरी तरह रोक सकते हैं।”

जन जन की आवाज़










