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पत्रकार हजरत खान पर जानलेवा हमला: परिवारिक विवाद बना हमले का कारण, पुलिस ने दर्ज की FIR,

पत्रकार हजरत खान पर जानलेवा हमला: परिवारिक विवाद बना हमले का कारण, पुलिस ने दर्ज की FIR,

बिलासपुर/कोरबा, 26 अगस्त 2025: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र मोरगा निवासी पत्रकार हजरत खान पर रविवार रात बिलासपुर में प्राणघातक हमला किया गया। हमले में हजरत खान के सिर, हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आई हैं। घटना का मुख्य कारण उनकी भतीजी शबाना खान और उनकी बेटी आलिया खान के बीच परिवारिक विवाद बताया जा रहा है। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराओं 296, 115(2), 351(2), 333 और 3(5) के तहत FIR दर्ज की है।

घटना के अनुसार, 24 अगस्त 2025 को हजरत खान को उनकी भतीजी शबाना खान ने फोन करके बुलाया। शबाना ने बताया कि उनकी बेटी आलिया ने थाने में उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसके कारण उन्हें थाने में हिरासत में रखा गया था। हजरत खान ने थाने जाकर मामले को सुलझाया और शबाना को घर भेजा। इसके बाद, वे परिवारिक विवाद को सुलझाने के लिए बिलासपुर पहुंचे, जहां शबाना किराए के मकान में रहकर घरेलू काम करके गुजारा करती हैं।
विवाद की जड़ आलिया के व्यवहार में थी। शबाना के अनुसार, आलिया पढ़ाई पर ध्यान नहीं देती, अनावश्यक घूमती-फिरती है और मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग करती है। शबाना द्वारा मना करने पर आलिया नाराज हो जाती और झगड़ा करती। शबाना ने यह भी बताया कि आलिया के कई लड़कों से संपर्क हैं, जिसके कारण वह उनकी बात नहीं मानती। हजरत खान ने आलिया को समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। रात होने पर वे शबाना के घर रुक गए।
रात करीब 3 बजे, संत कुमार तिवारी नामक व्यक्ति ने दरवाजा जोर-जोर से खटखटाया। हजरत खान ने दरवाजा खोला तो तिवारी ने खुद को घर का मालिक बताते हुए गाली-गलौज की और उन्हें बाहर निकालने को कहा। जैसे ही हजरत बाहर निकले, तिवारी और उनके पांच साथियों ने डंडे, लोहे की रॉड और चाकू से हमला कर दिया। हमला लगभग एक घंटे तक चला, जिसमें हजरत खान बुरी तरह घायल हो गए। पुलिस के पहुंचने पर हमलावर फरार हो गए। हजरत खान ने अपनी पत्नी रेशमा और साले शेखअकिल को सूचना दी, जिसके बाद सिटी कोतवाली थाने में FIR दर्ज कराई गई,

यह घटना पत्रकारों पर बढ़ते हमलों की एक और कड़ी है। हजरत खान, जो मोरगा पुलिस चौकी क्षेत्र के निवासी हैं, सक्रिय पत्रकारिता से जुड़े हैं। मामले की जांच जारी है, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून कब लागू होगा। छत्तीसगढ़ में पत्रकार संगठनों ने इस हमले की निंदा की है और आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है।

विनोद जायसवाल
विनोद जायसवाल
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