कोरबा विजय बेस्ट रानीअटरी, में, उठी विद्रोह की गूंज: ‘जल-जंगल-जमीन’ बचाने सड़क पर उतरा आदिवासी समाज, विधायक तुलेश्वर मरकाम ने भरी हुंकार, आदिवासी महापंचायत का ऐलान, प्रस्तावित कोयला खदान के खिलाफ उग्र विरोध, राष्ट्रपति के नाम पसान तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, वन अधिकार पत्रों की मांग तेज,,
कोरबा/कटघोरा 9 जनवरी 2026 पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत कोरबा जिले के विकासखंड पोंड़ी उपरोड़ा में प्रस्तावित नई कोयला खदान को लेकर आदिवासी समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय आदिवासी महापंचायत एवं जन आंदोलन का आयोजन किया गया।
इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोंड़ी उपरोड़ा के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए ग्राम पंचायत पुटीपखना, सेन्हा, जल्के एवं तनेरा में प्रस्तावित कोयला खदान को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। नव
कोयला खदान से आदिवासी अस्तित्व पर संकट
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कोयला मंत्रालय द्वारा जारी वैस्टिंग ऑर्डर के तहत विजय सेंट्रल कोल माइंस बीजाडांड को रूंगटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड को खनन हेतु आबंटित किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से संचालित रानी अटारी एवं विजय वेस्ट कोल माइंस से बीते 20–25 वर्षों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया, जबकि पर्यावरण, जंगल और आदिवासी जीवनशैली को भारी नुकसान पहुंचा है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि नई खदान खुलने से आदिवासियों की संस्कृति, धार्मिक आस्था, जंगल, पहाड़ और देवी-देवताओं से जुड़े स्थलों पर सीधा खतरा उत्पन्न होगा। साथ ही लकड़ी, चार, तेंदूपत्ता, महुआ, औषधीय जड़ी-बूटियों जैसे जीवनोपयोगी संसाधनों से आदिवासी वंचित हो जाएंगे।
हाथी प्रभावित क्षेत्र में खनन का विरोध
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह इलाका घनघोर हाथी प्रभावित क्षेत्र है, जहां जनजातीय राष्ट्रपति दत्तक पुत्र समुदाय निवासरत है। ऐसे में खनन से मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई गई है। आंदोलनकारियों ने इसे आदिवासी एवं वन्यजीव सुरक्षा के विरुद्ध बताया,
वन अधिकार पत्र वर्षों से लंबित
महापंचायत में वन अधिकार अधिनियम 2006 (संशोधित 2012) के तहत वर्षों से लंबित व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। जिला एवं उपखंड स्तरीय वन अधिकार समितियों से लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण कर पात्र हितग्राहियों को तत्काल वन अधिकार पत्र प्रदान करने की मांग की गई।
साथ ही पूर्व में अपात्र किए गए आवेदकों की पुनः समीक्षा कर उन्हें पात्र घोषित करने तथा नए सिरे से आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग भी की गई।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम एवं प्रदेश अध्यक्ष इंजी. संजय कमरो ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने जनभावनाओं की अनदेखी की तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।
आज का इस महा पंचायत जन आंदोलन में,
शांति व्यवस्था एवं सुरक्षा को लेकर कटघोरा एस डी ओ पी पुलिस विजय कुमार राजपूत, ने पसान पुलिस, बागों थाना प्रभारी रुपेश वर्मा, कटघोरा थाना प्रभारी धर्म नारायण तिवारी, एवं कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी, एवं अन्य पुलिस
राष्ट्रपति के नाम पसान तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन, वन अधिकार पत्रों की मांग तेज
विधायक तुलेश्वर मरकाम ने भरी हुंकार
कोरबा/पोंड़ी उपरोड़ा, 9 जनवरी 2026।
पांचवी अनुसूची क्षेत्र अंतर्गत कोरबा जिले के विकासखंड पोंड़ी उपरोड़ा में प्रस्तावित नई कोयला खदान को लेकर आदिवासी समाज में भारी आक्रोश देखने को मिला। शुक्रवार को गोंडवाना गणतंत्र पार्टी एवं विभिन्न सामाजिक संगठनों के संयुक्त तत्वावधान में एक दिवसीय आदिवासी महापंचायत एवं जन आंदोलन का आयोजन किया गया।
इस दौरान महामहिम राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) पोंड़ी उपरोड़ा के माध्यम से ज्ञापन सौंपते हुए ग्राम पंचायत पुटीपखना, सेन्हा, जल्के एवं तनेरा में प्रस्तावित कोयला खदान को तत्काल निरस्त करने की मांग की गई। नव
कोयला खदान से आदिवासी अस्तित्व पर संकट
ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि कोयला मंत्रालय द्वारा जारी वैस्टिंग ऑर्डर के तहत विजय सेंट्रल कोल माइंस बीजाडांड को रूंगटा सन्स प्राइवेट लिमिटेड को खनन हेतु आबंटित किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में पहले से संचालित रानी अटारी एवं विजय वेस्ट कोल माइंस से बीते 20–25 वर्षों में अपेक्षित विकास नहीं हो पाया, जबकि पर्यावरण, जंगल और आदिवासी जीवनशैली को भारी नुकसान पहुंचा है।
आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी कि नई खदान खुलने से आदिवासियों की संस्कृति, धार्मिक आस्था, जंगल, पहाड़ और देवी-देवताओं से जुड़े स्थलों पर सीधा खतरा उत्पन्न होगा। साथ ही लकड़ी, चार, तेंदूपत्ता, महुआ, औषधीय जड़ी-बूटियों एवं जैसे जीवनोपयोगी संसाधनों से आदिवासी वंचित हो जाएंगे।
हाथी प्रभावित क्षेत्र में खनन का विरोध
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि यह इलाका घनघोर हाथी प्रभावित क्षेत्र है, जहां जनजातीय राष्ट्रपति दत्तक पुत्र समुदाय निवासरत है। ऐसे में खनन से मानव–वन्यजीव संघर्ष बढ़ने की आशंका जताई गई है। आंदोलनकारियों ने इसे आदिवासी एवं वन्यजीव सुरक्षा के विरुद्ध बताया।
वन अधिकार पत्र वर्षों से लंबित
महापंचायत में वन अधिकार अधिनियम 2006 (संशोधित 2012) के तहत वर्षों से लंबित व्यक्तिगत एवं सामुदायिक वन अधिकार दावों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया गया। जिला एवं उपखंड स्तरीय वन अधिकार समितियों से लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण कर पात्र हितग्राहियों को तत्काल वन अधिकार पत्र प्रदान करने की मांग की गई।
साथ ही पूर्व में अपात्र किए गए आवेदकों की पुनः समीक्षा कर उन्हें पात्र घोषित करने तथा नए सिरे से आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ करने की मांग भी की गई।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के जिला अध्यक्ष विद्वान सिंह मरकाम एवं प्रदेश अध्यक्ष इंजी. संजय कमरो ने स्पष्ट किया कि यदि प्रशासन ने जनभावनाओं की अनदेखी की तो आंदोलन को और व्यापक एवं उग्र किया जाएगा।
आज का इस महा पंचायत जन आंदोलन में,
शांति व्यवस्था एवं सुरक्षा को लेकर कटघोरा एस डी ओ पी पुलिस विजय कुमार राजपूत, ने पसान पुलिस, बागों थाना प्रभारी रुपेश वर्मा, कटघोरा थाना प्रभारी धर्म नारायण तिवारी, एवं कोरबी चौकी प्रभारी सुरेश कुमार जोगी, एवं बांगो टी आई देवानंद जी अपने दल बल के साथ उपस्थित रहे

जन जन की आवाज़














