HomeUncategorizedकटघोरा में गणेश उत्सव 2025: भव्यता, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव का संगम,,

कटघोरा में गणेश उत्सव 2025: भव्यता, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव का संगम,,

कटघोरा में गणेश उत्सव 2025: भव्यता, भक्ति और सांस्कृतिक वैभव का संगम,,

 

छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले का कटघोरा शहर, गणेश उत्सव 2025 के अवसर पर भक्ति, उत्साह और सांस्कृतिक वैभव के रंग में पूरी तरह रंग चुका है। इस वर्ष ‘कटघोरा के राजा’ के आगमन ने न केवल स्थानीय निवासियों, बल्कि छत्तीसगढ़ और पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं को भी आकर्षित किया है। 20 अगस्त 2025 को शुरू हुई भव्य शोभायात्रा से लेकर आज, 29 अगस्त 2025, गणेश उत्सव के तीसरे दिन तक, कटघोरा में उत्सव का माहौल चरम पर है। ‘जय देव जय देव’ के जयघोष और भक्ति के रंग में डूबा यह शहर धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों का एक अनुपम केंद्र बन चुका है।

‘कटघोरा के राजा’ की भव्य शोभायात्रा
20 अगस्त को ‘कटघोरा के राजा’ की शोभायात्रा कासनिया से शुरू हुई, जो मुख्य मार्गों से गुजरते हुए नगर में प्रवेश की थी। इस ऐतिहासिक स्वागत यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए, जिन्होंने रंग-बिरंगे सांस्कृतिक कार्यक्रमों, ढोल-नगाड़ों, और आतिशबाजी के साथ उत्सव को यादगार बना दिया। शोभायात्रा में हनुमान जी की झाँकी, शंखनाथ गोंदिया से आए भवानी ढोल पाठक, और मुंबई से आई पुष्पा की प्रस्तुति ने सभी का मन मोह लिया। शहीद वीरनारायण चौक पर रंगोली, स्केटिंग, और भव्य स्वागत मंच ने इस आयोजन को और भी आकर्षक बनाया। कोरबा सहित आसपास के जिलों और अन्य राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने इस शोभायात्रा में उत्साहपूर्वक भाग लिया।

,,पद्मनाभस्वामी मंदिर थीम पर आधारित भव्य पंडाल,,

 

इस वर्ष जय देवा गणेश उत्सव समिति ने केरल के तिरुअनंतपुरम स्थित भगवान विष्णु के प्रसिद्ध पद्मनाभस्वामी मंदिर की थीम पर आधारित एक भव्य पंडाल तैयार किया है। 111 फीट ऊँचा यह पंडाल न केवल कटघोरा, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ में आस्था और आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। इस पंडाल का निर्माण कोलकाता के निपुण कारीगरों द्वारा युद्धस्तर पर किया गया, जो अपनी बारीक कारीगरी और भव्यता के लिए प्रसिद्ध हैं।
पंडाल का मुख्य आकर्षण 21 फीट ऊँची भगवान गणेश की विशाल प्रतिमा है, जिसे छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के थाना क्षेत्र में स्थित राधे आर्ट गैलरी ने बनाया है। इस प्रतिमा की भव्यता और कारीगरी ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। रोजाना हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस पंडाल में दर्शन के लिए पहुँच रहे हैं। गंगा आरती की थीम पर आधारित दैनिक आरती और भजन-कीर्तन ने भक्ति का माहौल और गहरा कर दिया है।
जय देव गणेश उत्सव समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल भव्य पंडाल और प्रतिमा तैयार करना नहीं, बल्कि लोगों में भक्ति, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रोत्साहित करना भी है। इस वर्ष की थीम और आयोजन ने कटघोरा को छत्तीसगढ़ के धार्मिक मानचित्र पर एक विशेष स्थान दिलाया है।

,,अंबिकापुर रोड का मटकी धाम थीम पंडाल,,

कटघोरा के अंबिकापुर रोड पर आदर्श गणेश उत्सव समिति द्वारा निर्मित मटकी धाम  पंडाल भी इस उत्सव का एक प्रमुख आकर्षण है। इस पंडाल में 1100 मटकियों से सजाया गया भव्य दरबार बनाया गया है, जिसमें 13 फीट ऊँची गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। समिति के सदस्य राहुल अग्रवाल ने बताया कि पिछले 15 वर्षों से यह समिति हर साल एक नई थीम के साथ कटघोरा के महाराजा का पंडाल सजाती है।

इस वर्ष मटकी धाम के थीम ने श्रद्धालुओं को अपनी ओर आकर्षित किया है। रोजाना होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रम, भजन-कीर्तन, और अन्य आयोजन इस पंडाल को और भी जीवंत बनाते हैं।

,,तहसील प्रांगण में बाल समिति का अनोखा प्रयास,,

कटघोरा के तहसील प्रांगण में इस बार बाल समिति ने भी गणेश उत्सव को विशेष बनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। यहाँ स्थापित गणेश प्रतिमा को वीर बजरंगी (हनुमान जी) के गेटअप में प्रस्तुत किया गया है, जो एक अनोखा और आकर्षक प्रयोग है।

इस थीम ने विशेष रूप से युवाओं और बच्चों को आकर्षित किया है। रोजाना बढ़ती श्रद्धालुओं की संख्या इस बात का प्रमाण है कि यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सामुदायिक एकता को बढ़ावा देने में भी सफल रहा है।

,,सांस्कृतिक और सामाजिक प्रभाव,,

कटघोरा का गणेश उत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक बन चुका है। जय देव गणेश उत्सव समिति, आदर्श गणेश उत्सव समिति, और बाल समिति जैसे संगठनों के प्रयासों ने कटघोरा को छत्तीसगढ़ और देश के धार्मिक आयोजनों के मानचित्र पर एक महत्वपूर्ण स्थान दिलाया है। आतिशबाजी, रंगोली, स्केटिंग, और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों जैसे आयोजनों ने इस उत्सव को सभी आयु वर्ग के लिए आकर्षक बनाया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि इन आयोजनों ने कटघोरा को एक धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में स्थापित किया है। हर साल नए और अनोखे पंडालों की थीम और भव्यता श्रद्धालुओं की संख्या को दोगुना कर रही है। इस वर्ष के आयोजन ने भी भक्तों को भक्ति और भव्यता का एक अनूठा अनुभव प्रदान किया है।

विनोद जायसवाल
विनोद जायसवाल
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