अद्भुत है मातिन दाई का धाम: जहाँ नहीं होती कोई मूर्ति, केवल ‘आसन’ की पूजा से पूरी होती हैं मुरादें,,
कटघोरा/पोड़ीउपरोडा: छत्तीसगढ़ के कण-कण में देवी-देवताओं का वास है, लेकिन कटघोरा के पास मातिन पहाड़ पर स्थित मां मातिन दाई का मंदिर अपनी अनूठी परंपरा के लिए विख्यात है।
यहाँ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर के गर्भगृह में माता की कोई प्रतिमा स्थापित नहीं है, बल्कि श्रद्धालु सदियों से माता के आसन की पूजा करते आ रहे हैं।
रहस्यों से भरी है मंदिर की उत्पत्ति
मान्यता है कि प्राचीन काल में यहाँ गोंडवंशी राजाओं का शासन था। लोककथाओं के अनुसार, माता स्वयं पीपर कुंड में स्नान करने आती थीं।
उनका मूल निवास उत्तर दिशा की एक गुफा में था। कहा जाता है कि एक बार एक बैगा पुजारी गुफा में अपनी कटार भूल गए थे, जिसे लेने वे वापस अंदर गए लेकिन कभी लौटकर नहीं आए। इसके बाद उस रहस्यमयी गुफा का द्वार पत्थरों से बंद हो गया, जो आज भी मौजूद है। सुरक्षा कारणों से अब उस गुफा की ओर जाना प्रतिबंधित है।

वर्तमान मंदिर का निर्माण बाद में जटगा निवासी स्व. अमरचंद सेठ द्वारा कराया गया, जहाँ साल वृक्ष के नीचे माता के आसन को स्थापित किया गया।
575 ज्योति कलशों से जगमगाया पहाड़
चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर मातिन पहाड़ भक्ति के रंग में डूबा हुआ है। इस वर्ष श्रद्धा के प्रतीक स्वरूप 575 ज्योति कलश प्रज्वलित किए गए हैं। पहाड़ की ऊंचाइयों पर स्थित इस धाम में अमीर-गरीब का भेद मिट जाता है और सभी माँ के दरबार में शीश नवाते हैं। 19 मार्च से शुरू हुआ यह उत्सव 27 मार्च तक जारी रहेगा, जिसमें छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुँच रहे हैं।
युवाओं की अनूठी सेवा: कांवड़ से पहुँचा रहे पानी
पहाड़ की दुर्गम चढ़ाई और जल संकट को देखते हुए स्थानीय युवाओं ने सेवा की नई मिसाल पेश की है। मातिन दाई सेवा समिति, जटगा जल सेवा समिति और नव युवक मंडल के उत्साही युवा कांवड़ के जरिए पहाड़ के ऊपर तक पानी पहुँचा रहे हैं। चढ़ाई के मुख्य स्थानों पर भी पेयजल की व्यवस्था की गई है, ताकि दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को कोई असुविधा न हो।
आस्था और परंपरा का केंद्र
कठिन चढ़ाई और दुर्गम रास्ता होने के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं होता। मातिन दाई का यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि यह क्षेत्र की प्राचीन संस्कृति और निस्वार्थ सेवा भावना का जीवंत उदाहरण भी है।

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