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हाथी प्रभावित केंद्रों में ‘धान’ बना मुसीबत: उठाव में देरी से फड़ प्रभारियों की जान जोखिम में, कभी भी हो सकता है हमला,,

हाथी प्रभावित केंद्रों में ‘धान’ बना मुसीबत: उठाव में देरी से फड़ प्रभारियों की जान जोखिम में, कभी भी हो सकता है हमला,,

कोरबा/कटघोरा: जिले के धान उपार्जन केंद्रों में खरीदी समाप्त हुए 17 दिन से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन धान का उठाव कछुआ गति से होने के कारण अब संकट गहराने लगा है। विशेष रूप से चोटिया, कोरबी और जटगा जैसे हाथी प्रभावित क्षेत्रों में खुले आसमान के नीचे रखा लाखों क्विंटल धान हाथियों को रिहायशी इलाकों की ओर खींच रहा है। शासन के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद मिलर्स द्वारा धान उठाव में की जा रही देरी से ग्रामीणों और केंद्र प्रभारियों में भारी आक्रोश और भय व्याप्त है।

आंकड़ों की जुबानी: 11 लाख क्विंटल धान अब भी केंद्रों में जाम
जिले में इस वर्ष कुल 27.47 लाख क्विंटल धान की खरीदी की गई है। ताज्जुब की बात यह है कि इसमें से 11 लाख क्विंटल धान अभी भी केंद्रों में डंप पड़ा है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन 11 संवेदनशील केंद्रों की है जो सीधे तौर पर हाथी प्रभावित क्षेत्र में आते हैं। इन केंद्रों में लगभग ढाई लाख क्विंटल धान रखा हुआ है, जिसकी महक हाथियों के दल को अपनी ओर आकर्षित कर रही है।

इन केंद्रों पर मंडरा रहा है खतरा
हाथी प्रभावित क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले प्रमुख केंद्र जहाँ स्थिति तनावपूर्ण है:
* पसान, जटगा, कोरबी, कुदमुरा, चचिया, गुरमा, मोरगा, पिपिरया, केरवाद्वारी, बरपाली, लेमरू और श्यांग।
इन क्षेत्रों में हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है। हाल ही में जटगा परिक्षेत्र के धोबीबारी में हाथियों ने 10 मकानों को ध्वस्त कर दिया और मवेशियों की जान ले ली, जिससे यह स्पष्ट है कि दल कभी भी उपार्जन केंद्रों का रुख कर सकता है।

कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी?
कलेक्टर ने पूर्व में ही निर्देशित किया था कि हाथी प्रभावित संवेदनशील क्षेत्रों से धान उठाव को ‘वरीयता’ (Priority) दी जाए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। मिलर्स डीओ (Delivery Order) कटवाने के लिए तो सक्रिय हैं, लेकिन उठाव की गति अत्यंत धीमी है।
फड़ प्रभारियों की दोहरी मार
* जान का जोखिम: हाथियों के डर के साये में फड़ प्रभारियों को रात-रात भर जागकर धान की रखवाली करनी पड़ रही है।

* जवाबदेही का डर: नियमानुसार, यदि केंद्र में धान खराब होता है या हाथी नुकसान पहुँचाते हैं, तो इसकी जिम्मेदारी नोडल अधिकारी और फड़ प्रभारी की तय की गई है। ऐसे में कर्मचारी दोहरी मुसीबत में फंसे हैं।
पिछले वर्ष के मुकाबले खरीदी में गिरावट
इस वर्ष जिले के 52,556 पंजीकृत किसानों में से लगभग 42,000 ने धान बेचा है। पिछले वर्ष 65 केंद्रों पर 29 लाख क्विंटल की खरीदी हुई थी, जबकि इस बार यह आंकड़ा लगभग 2 लाख क्विंटल कम रहा है। कम खरीदी के बावजूद उठाव की समस्या इस बार अधिक विकराल रूप ले रही है।
> चेतावनी: यदि समय रहते संवेदनशील केंद्रों से धान का परिवहन नहीं किया गया, तो हाथियों का दल बड़ी जन-धन की हानि कर सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और मिलर्स की होगी।


विनोद जायसवाल
विनोद जायसवाल
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